26 January 2026: गणतंत्र दिवस के बारे में वो 5 रोचक बातें जो 90% लोग नहीं जानते
हर साल 26 जनवरी को पूरा भारत तिरंगे के रंग में रंगा नजर आता है। साल 2026 में हम अपना गणतंत्र दिवस (Republic Day) मना रहे हैं। स्कूलों में लड्डू बंटते हैं, टीवी पर परेड आती है और हम देशभक्ति के गीतों में झूमते हैं।
लेकिन, क्या आपको वाकई पता है कि हम 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं? या फिर राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर पहली परेड कब हुई थी?
The Hind Time की इस स्पेशल रिपोर्ट में, हम आपको गणतंत्र दिवस से जुड़े 5 ऐसे फैक्ट्स बताएंगे जो शायद आपको स्कूल की किताबों में भी नहीं मिले होंगे।
1. 26 जनवरी की तारीख ही क्यों चुनी गई? (Why January 26?)
बहुत से लोगों को लगता है कि हमारा संविधान 26 जनवरी को बनकर तैयार हुआ था, इसलिए यह तारीख चुनी गई। लेकिन यह सच नहीं है! हमारा संविधान तो 26 नवंबर 1949 को ही बनकर तैयार हो गया था। लेकिन इसे लागू करने के लिए 2 महीने इंतजार किया गया और 26 जनवरी 1950 को चुना गया।
वजह: साल 1930 में इसी दिन (26 जनवरी) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पहली बार ‘पूर्ण स्वराज’ (Total Independence) की घोषणा की थी। उस ऐतिहासिक दिन को सम्मान देने के लिए ही संविधान लागू करने की तारीख 26 जनवरी चुनी गई।
2. हाथ से लिखा गया था संविधान (Handwritten Constitution)
भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी असली कॉपी प्रिंट नहीं की गई थी? जी हां, इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से लिखा था (Calligraphy)। उन्होंने इसे लिखने के लिए इटैलिक स्टाइल का इस्तेमाल किया था और हर पन्ने को शांतिनिकेतन के कलाकारों ने सजाया था। आज भी संविधान की ओरिजिनल कॉपी संसद भवन की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में सुरक्षित रखी है।
3. सबसे पहली परेड राजपथ पर नहीं हुई थी
आज हम ‘कर्तव्य पथ’ (पुराना नाम राजपथ) पर जो भव्य परेड देखते हैं, वह हमेशा से वहां नहीं होती थी। 1950 से 1954 के बीच, गणतंत्र दिवस की परेड अलग-अलग जगहों पर होती थी—जैसे इरविन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे, और लाल किला। साल 1955 में पहली बार राजपथ पर परेड का आयोजन शुरू हुआ और तब से यह परंपरा बन गई।
4. ‘Abide With Me’ धुन का महत्व
गणतंत्र दिवस का जश्न 29 जनवरी को ‘बीटिंग रिट्रीट’ (Beating Retreat) सेरेमनी के साथ खत्म होता है। इसमें एक खास धुन बजाई जाती थी जिसका नाम था ‘Abide With Me’। यह महात्मा गांधी की पसंदीदा धुनों में से एक थी। हालांकि, अब भारतीय धुनों को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन इतिहास में इस धुन का अपना एक खास महत्व रहा है।
5. मुख्य अतिथि (Chief Guest) की परंपरा
भारत हर साल गणतंत्र दिवस पर किसी दूसरे देश के राष्ट्रध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाता है। क्या आप जानते हैं कि 1950 में पहले गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि कौन थे? वो थे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो। यह परंपरा भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की सोच और वैश्विक मैत्री को दर्शाती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
गणतंत्र दिवस सिर्फ एक छुट्टी का दिन नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों और इतिहास को याद करने का दिन है। 2026 में जब आप तिरंगा फहराएं, तो इन रोचक बातों को अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें।
The Hind Time की तरफ से आप सभी को गणतंत्र दिवस की ढेरों शुभकामनाएं! जय हिन्द!
क्या आपको पता है संविधान बनने में कितना समय लगा था? (A) 2 साल (B) 3 साल? कमेंट में बताएं।